अमेरिकी लोगों से ठगी करने वाले एक और कॉलसेंटर का भंडाफोड़

अमेरिकी लोगों से ठगी करने वाले एक और कॉलसेंटर का भंडाफोड़


IN8@नई ​ि​दल्ली,(भरत निषाद): दिल्ली-एनसीआर में लोगों को ठगने के नए-नए तरीके ठग अपना रहे हैं। सोशल सिक्योरिटी नंबर का मैसेज भेजकर यूएस नागरिकों को गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का गुरुग्राम पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी गिरफ्तारी का डर दिखाकर यूएस नागरिकों से 200 से 500 डॉलर की ठगी करते थे। एसीपी करण गोयल ने बताया कि इंस्पेक्टर आजाद सिंह को सूचना मिली थी कि गुरुग्राम के सेक्टर-23 के प्लॉट नंबर 3202 में फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा है। इस पर छापेमारी कर टीम तैयार की गई। टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि कुछ युवक, युवतियां कंप्यूटर के जरिए फोन कर रहे हैं। यहां मौजूद टीम लीडर वेस्ट मुंबई निवासी जरार हैदर ने बताया कि यह विदेशियों को ठगने के लिए वाउचर ग्रुप में भेजते हैं। मौके पर कॉल सेंटर टेक्नीशियन भोपाल निवासी प्राथीश पटेल व निशर्ग को भी काबू किया गया। उन्होंने बताया कि वह किस तरह से यूएस नागरिकों को कॉल करते हैं। यूएस नागरिकों को कॉल कर रहे 20 युवक व 11 युवतियों से भी पुलिस ने पूछताछ की।


पूछताछ में सामने आया कि कॉल सेंटर को जिगर प्रमार, भोला, दीपक व मौलिक चला रहे हैं। दो महीने पहले ही उन्होंने यह मकान किराए पर लिया था। उन्हें यह कार्य करने के लिए सैलरी दी जाती है। जांच के दौरान पाया गया कि इन्होंने अलग-अलग वेबसाइट के जरिए यूएस नागरिकों का डाटा लिया है और वीसी डायलर के जरिए यूएस नागरिकों को फोन करते हैं। आरोपी ठगी की राशि को ट्रांसफर करवाने के लिए ईबे, गूगल पे, टारगेट व नाइक के जरिए गिफ्ट कार्ड खरिदवाते थे। गिफ्ट कार्ड के कोड को लेकर वह राशि को अपने खाते में जमा करा देते थे। पुलिस ने मौके से दो लैपटॉप व दो मोबाइल कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।


यहां भी हो रही थी सैकड़ों डॉलरों में ठगी:पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अमेरिकी नागरिकों का डाटा आनलाइन अलग-अलग वेबसाइट से खरीदकर अपने सर्वर वीआइसीआइ डायलर पर अपलोड करके तीन से चार हजार लोगों को काल करके उन्हेंं सोशल सिक्योरिटी नंबर ब्लाक करने भय दिखाते थे। इसके बाद उनसे 200 से 500 डालर की मांगते थे। मना करने पर नंबर सस्पेंड करने या अरेस्ट वारंट का खौफ दिखाते थे। इसके बाद ग्राहक से टारगेट, ई-बे, नाइक एवं गूगलप्ले के गिफ्ट वाउचर खरीदवाकर वसूली करते थे।

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