लखनऊ में होली पर आबकारी की ‘सुरक्षा ढाल’, अवैध कारोबारियों के लिए नो-एंट्री

तीन शिफ्टों में सीमाओं पर पहरा, बाहरी राज्यों की हर गाड़ी की सघन तलाशी

होटल, ढाबा, क्लब हाउस पर छापेमारी, बिना लाइसेंस परोसने वालों पर सख्त कार्रवाई

गांव-गांव दस्तक, मिलावटी शराब के खिलाफ जागरूकता और त्वरित दबिश

लखनऊ। फागुन की बयार के साथ होली का उल्लास पूरे प्रदेश में छाने लगा है। बाजारों में रौनक है, रंग-गुलाल की खरीदारी तेज है और इसके साथ ही शराब की मांग भी बढऩे लगी है। ऐसे में हर वर्ष की तरह इस बार भी शराब माफिया सक्रिय हो उठे हैं। अवैध शराब का निर्माण, मिलावटी सप्लाई और बाहरी राज्यों से तस्करी-ये सभी गतिविधियां आमजन की सुरक्षा और सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। लेकिन इस बार शराब माफिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती आबकारी विभाग की सख्त रणनीति है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में विभाग ने होली से पहले ही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए व्यापक अभियान छेड़ दिया है। उनकी कार्यशैली और रणनीतिक दृष्टिकोण ने विभाग को पूरी तरह एक्शन मोड में ला दिया है। करुणेन्द्र सिंह ने साफ निर्देश दिए हैं कि आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है और आबकारी नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाईवे, राजमार्ग और राष्ट्रीय मार्गों पर 24 घंटे तीन शिफ्टों में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है ताकि अवैध शराब की खेप जिले में प्रवेश न कर सके। उनके नेतृत्व में जिले की 15 टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। इन टीमों में आबकारी निरीक्षक रिचा सिंह, राहुल सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, विवेक सिंह, अभिषेक सिंह, रजनीश प्रताप सिंह, अरविंद बघेल, कौशलेन्द्र रावत, प्रदीप शुक्ला, अखिलेश चौधरी, अखिल गुप्ता, मोनिका यादव, रामश्याम त्रिपाठी, शिखर मल्ल और विजय राठी शामिल हैं। सभी निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दुकानें बंद होने के बाद भी फील्ड में सक्रिय रहें और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करें। लाइसेंसी शराब की दुकानों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।

स्टॉक का मिलान, बिक्री रजिस्टर की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल नियमित रूप से की जा रही है। टेस्ट परचेजिंग जैसे कड़े कदम उठाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी दुकानदार नियमों से खिलवाड़ न कर सके। पहली बार पकड़े जाने पर चेतावनी दी जाती है, लेकिन दोबारा गलती पर सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। देहात क्षेत्रों में अवैध शराब के निर्माण पर विशेष फोकस किया गया है। मिलावटी शराब से जानलेवा घटनाओं की आशंका को देखते हुए आबकारी विभाग ने ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि अवैध शराब न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह जान के लिए भी घातक है।

करुणेन्द्र सिंह की कार्यशैली की खास बात यह है कि उन्होंने केवल दमनात्मक कार्रवाई पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि सामुदायिक सहभागिता को भी अभियान का हिस्सा बनाया है। स्थानीय लोगों, महिलाओं और युवाओं को मुखबिर तंत्र से जोड़ा गया है ताकि किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग तक पहुंच सके। इससे विभाग की ‘आंख और कान’ हर गांव और मोहल्ले तक सक्रिय हो गए हैं। इसके अलावा बिना लाइसेंस शराब परोसने वाले होटल, रेस्टोरेंट, क्लब हाउस, फार्महाउस और ढाबों पर भी लगातार छापेमारी की जा रही है। अवैध पार्टियों और चोरी-छिपे शराब वितरण पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। जिला आबकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि होली के उल्लास को किसी भी सूरत में अवैध गतिविधियों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि त्योहार खुशी और सौहार्द का प्रतीक है। इसे सुरक्षित और कानून-व्यवस्था के दायरे में रखना हमारी जिम्मेदारी है। अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। करुणेन्द्र सिंह और उनकी टीम की मुस्तैदी ने शराब माफिया को साफ संदेश दे दिया है कि इस बार होली पर अवैध कारोबार करना आसान नहीं होगा। सख्त निगरानी, तकनीकी साधनों का उपयोग, जागरूकता अभियान और सामुदायिक सहभागिता-इन सभी उपायों ने आबकारी विभाग को एक मजबूत ढाल बना दिया है। होली के रंगों के बीच प्रशासन की यह सख्ती आमजन को सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि इसी तरह सतर्कता बनी रही तो निश्चित ही यह होली सुरक्षित, संयमित और कानून के दायरे में मनाई जाएगी।

होली पर्व को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए आबकारी विभाग की टीमें पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। दिन हो या रात, हाईवे हो या देहात-हर क्षेत्र में टीमें सक्रिय निगरानी कर रही हैं। सीमाओं पर लगातार चेकिंग, संदिग्ध वाहनों की तलाशी और अवैध शराब की खेप पकडऩे के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। लाइसेंसी दुकानों की नियमित जांच, स्टॉक मिलान और दस्तावेजों की पड़ताल से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नियमों का अक्षरश: पालन हो। बिना लाइसेंस शराब परोसने वाले होटल, ढाबे, क्लब और फार्महाउस पर ताबड़तोड़ छापेमारी विभाग की सख्ती को दर्शाती है। टीमों की कार्यशैली की खास बात उनकी त्वरित कार्रवाई और जमीनी उपस्थिति है। मुखबिर तंत्र को सक्रिय रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में भी अवैध शराब निर्माण के खिलाफ लगातार दबिश दी जा रही है। जागरूकता अभियान के जरिए आमजन को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है, जिससे विभाग की निगरानी और मजबूत हुई है। आबकारी विभाग की यह मुस्तैदी साफ संदेश देती है कि त्योहार की आड़ में कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

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