NHAI की पांच साल की सेवा सीमा बनी बड़ा सवाल, अनुभवी साइट इंजीनियरों का भविष्य अब न्यायिक फैसले के भरोसे

-साइट इंजीनियरों की तकनीकी भूमिका पर जोर, परियोजनाओं की निगरानी और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका
-NHAI की नीति पर न्यायिक कसौटी, सेवा अवधि के साथ अनुभव और कार्य प्रदर्शन को आधार बनाने की मांग
-वर्षों से परियोजनाओं की निगरानी कर रहे अभियंता बोले, अनुभव को अचानक खत्म करना उचित नहीं

नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा नीति परिपत्र संख्या 1.3.3.30/2026, दिनांक 02 फरवरी 2026 के माध्यम से अधिकतम पांच वर्ष की सेवा अवधि संबंधी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग एवं द्रुतमार्ग परियोजनाओं में वर्षों से कार्यरत अनुभवी स्थल अभियंताओं (Site Engineers) के भविष्य को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि इस नीति के प्रभाव से लंबे समय से परियोजनाओं में कार्य कर रहे अनुभवी स्थल अभियंताओं को आगे सेवाएं जारी रखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, तकनीकी निरंतरता, संस्थागत अनुभव तथा साइट स्तर पर जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।

प्रभावित अभियंताओं के अनुसार, उनमें से अनेक अभियंता पिछले छह से पंद्रह वर्षों से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की विभिन्न परियोजनाओं में सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों में कठिन भौगोलिक एवं मौसम संबंधी परिस्थितियों के बीच निर्माण कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मानकों के अनुपालन, तकनीकी समस्याओं के समाधान तथा परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि केवल सेवा अवधि पूरी होने के आधार पर ऐसे अनुभवी तकनीकी मानव संसाधन को परियोजनाओं से अलग कर देना संगठन के लिए दीर्घकालिक नुकसान का कारण बन सकता है।

प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की परियोजनाओं में कार्यरत स्थल अभियंताओं का चयन एवं तैनाती NHAI की स्वीकृत प्रक्रिया के तहत की जाती रही है। वर्षों तक इन्हीं अभियंताओं को परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रगति की निगरानी तथा विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। साइट स्तर पर वे प्राधिकरण के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते रहे और अनेक राष्ट्रीय राजमार्ग एवं द्रुतमार्ग परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि आज वही अनुभवी तकनीकी मानव संसाधन पांच वर्ष की सेवा अवधि संबंधी नीति के कारण परियोजनाओं से बाहर होने की स्थिति में है। उनका मानना है कि यह केवल रोजगार का विषय नहीं, बल्कि वर्षों में विकसित संस्थागत अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और साइट स्तर की जवाबदेही को सुरक्षित रखने का भी प्रश्न है।

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में स्थल अभियंता केवल तकनीकी कर्मचारी नहीं, बल्कि साइट पर प्राधिकरण की “आंख और कान” के रूप में कार्य करते हैं। वे प्रतिदिन निर्माण गतिविधियों की निगरानी करते हैं, गुणवत्ता मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हैं तथा किसी भी तकनीकी कमी, सुरक्षा संबंधी मुद्दे या निर्माण में अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होते हैं। प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि यदि ऐसे अनुभवी स्थल अभियंता परियोजनाओं से अलग हो जाते हैं, तो साइट स्तर पर जवाबदेही, निरंतर तकनीकी मॉनिटरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण तथा समय पर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है, जिसका असर परियोजनाओं की गुणवत्ता और कार्य निष्पादन पर पड़ सकता है।

प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि पिछले कई वर्षों में देशभर में समयबद्ध रूप से पूर्ण हुई अनेक राष्ट्रीय राजमार्ग एवं द्रुतमार्ग परियोजनाओं में स्थल अभियंताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइट स्तर पर निर्माण कार्यों की दैनिक निगरानी, विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय, तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान, गुणवत्ता नियंत्रण, कार्य प्रगति की नियमित समीक्षा तथा परियोजना से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ सतत समन्वय की जिम्मेदारी वे निरंतर निभाते रहे हैं। उनका कहना है कि परियोजनाओं की प्रगति और समयबद्ध निष्पादन में साइट स्तर पर होने वाला यह समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जिसे वर्षों के अनुभव से ही प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।

प्रभावित अभियंताओं के अनुसार, वर्षों तक किसी परियोजना पर कार्य करने से अभियंताओं को उस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, निर्माण संबंधी चुनौतियों, स्थानीय व्यवस्थाओं तथा परियोजना की तकनीकी बारीकियों की गहरी समझ विकसित हो जाती है। यही अनुभव कठिन परिस्थितियों में त्वरित और व्यावहारिक निर्णय लेने में सहायक होता है। उनका मानना है कि ऐसे अनुभव को केवल सेवा अवधि के आधार पर समाप्त कर देना राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाओं के हित में नहीं माना जा सकता।

भारत इस समय विश्वस्तरीय सड़क अवसंरचना विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों और द्रुतमार्गों का लगातार विस्तार हो रहा है। ऐसे समय में वर्षों से विकसित तकनीकी अनुभव और संस्थागत ज्ञान का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है जितना नई परियोजनाओं का निर्माण। प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि अनुभवी तकनीकी मानव संसाधन का प्रभावी उपयोग परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा, जवाबदेही और समयबद्ध निष्पादन को और अधिक सुदृढ़ बना सकता है।

उल्लेखनीय है कि NHAI की नीति परिपत्र संख्या 1.3.3.30/2026 दिनांक 02.02.2026 को विभिन्न न्यायिक मंचों पर चुनौती दी गई है। प्रभावित अभियंताओं के अनुसार यह मामला मद्रास उच्च न्यायालय, नई दिल्ली स्थित केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) तथा चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) सहित अन्य न्यायिक मंचों के समक्ष विचाराधीन है। प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उन्हें उम्मीद है कि न्यायिक मंच सेवा अनुभव, तकनीकी योगदान, परियोजनाओं की आवश्यकता तथा रोजगार से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करते हुए उचित निर्णय देंगे।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े अवसंरचना संगठन की सबसे बड़ी ताकत केवल उसके संसाधन नहीं, बल्कि वर्षों में विकसित हुआ संस्थागत अनुभव होता है। किसी परियोजना पर लंबे समय तक कार्य करने वाले अभियंता केवल अपना दायित्व नहीं निभाते, बल्कि अपने अनुभव, तकनीकी समझ और व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से संगठन की कार्यक्षमता को भी मजबूत करते हैं। यही अनुभव भविष्य की परियोजनाओं में गुणवत्ता बनाए रखने, तकनीकी जोखिमों को कम करने तथा जटिल परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

देशभर के प्रभावित अभियंताओं ने केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पांच वर्ष की सेवा संबंधी नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि सेवा अवधि के साथ-साथ अनुभव, कार्य प्रदर्शन, तकनीकी दक्षता तथा परियोजना की आवश्यकता जैसे पहलुओं को भी नीति निर्धारण का आधार बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क निर्माण केवल डामर और कंक्रीट का कार्य नहीं है, बल्कि उसके पीछे वर्षों का तकनीकी अनुभव, गुणवत्ता नियंत्रण, समन्वय, जवाबदेही और विशेषज्ञता कार्य करती है। इसलिए विकसित भारत के लक्ष्य के साथ-साथ उस अनुभव और संस्थागत ज्ञान को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है, जिसने देश की आधुनिक सड़क अवसंरचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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