ओवररेटिंग और अवैध वसूली में फंसे शराब लाइसेंसी,  लाइसेंसियों की करतूतें कैमरे में कैद


-ओवररेटिंग और अवैध वसूली से गरीब ग्राहकों की जेबों पर डालते है डाका, कार्यवाही देख विभाग पर ही लगा दिया आरोप
-सीसीटीवी और ग्राहकों से संवाद के जरिए सामने आ रही दुकानदारों की करतूतें
-नियम तोडऩे वाले लाइसेंसियों पर कार्रवाई से बौखलाए कारोबारी, विभाग पर ही लगाने लगे आरोप

गाजियाबाद। प्रदेश सरकार जहां एक ओर प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ शराब दुकानों के लाइसेंसी अपनी मनमानी और अवैध वसूली से विभागीय व्यवस्था को बदनाम करने में जुटे हुए हैं। आबकारी विभाग की टीम लगातार सड़कों पर उतरकर शराब बिक्री व्यवस्था को सुधारने और आमजन के हितों की रक्षा के लिए अभियान चला रही है, लेकिन कुछ अनुज्ञापी नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम ग्राहकों की जेब पर डाका डालने से बाज नहीं आ रहे। आबकारी विभाग ने शराब दुकानों पर ओवररेटिंग रोकने और बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था लागू कर रखी है। विभागीय अधिकारी समय-समय पर इन कैमरों की फुटेज की जांच कर दुकानों पर हो रही गतिविधियों पर नज़र रखते हैं। इसके अलावा विभाग की टीम अब सीधे ग्राहकों से संवाद कर दुकानों की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटा रही है। यही वजह है कि कई शराब दुकानों की असलियत अब खुलकर सामने आने लगी है।

सूत्रों के अनुसार विजय नगर क्षेत्र के डूंडेहड़ा नंबर-1 स्थित देशी शराब की दुकान, जिसका संचालन लाइसेंसी आकाश त्यागी के नाम से बताया जा रहा है, तथा कृष्णानगर बागू बाईपास एनएच-24 स्थित रिंकू मलिक के नाम संचालित शराब दुकानों पर ग्राहकों से खुलेआम अतिरिक्त वसूली किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि दिन हो या रात, इन दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूले जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब खरीदने आने वाले अधिकांश ग्राहक मजदूर वर्ग और गरीब तबके से जुड़े होते हैं। ऐसे में विवाद से बचने के लिए वे मजबूरी में दुकानदारों को अतिरिक्त पैसे दे देते हैं। दुकानों पर मौजूद विक्रेता पहले  ‘चाय-पानी’ के नाम पर और फिर खुले पैसे न होने का बहाना बनाकर पांच से दस रुपये तक अतिरिक्त वसूली करते हैं। यही छोटी-छोटी रकम दिनभर में हजारों रुपये तक पहुंच जाती है। बताया जा रहा है कि इन दुकानों से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए हैं, जिनमें ग्राहकों से कथित अवैध वसूली और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद आबकारी विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दुकानों की निगरानी और तेज कर दी है। विभागीय टीम अब केवल दुकानों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राहकों से सीधे बातचीत कर लाइसेंसियों और विक्रेताओं की कार्यशैली की जानकारी ले रही है।

आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जमीनी स्तर पर सही जानकारी ग्राहकों से संवाद के बाद ही मिलती है। इसी आधार पर विभाग कार्रवाई की रणनीति तैयार करता है। विभाग ने कई दुकानों को नोटिस जारी करने के साथ जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई भी की है। बावजूद इसके कुछ लाइसेंसी अपनी कार्यप्रणाली सुधारने के बजाय विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए उल्टे अधिकारियों पर ही आरोप लगाने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक कुछ दुकानों पर मौजूद विक्रेता और लाइसेंसी खुद नशे की हालत में रहते हैं, जिससे ग्राहकों के साथ विवाद और अव्यवस्था की स्थिति पैदा होती है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में आबकारी विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियम उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आबकारी विभाग की टीम का कहना है कि सरकार की मंशा शराब बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी और नियमबद्ध बनाना है। विभागीय अधिकारी लगातार दुकानों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि ग्राहकों को निर्धारित मूल्य पर ही शराब उपलब्ध हो सके और किसी प्रकार की अवैध वसूली न हो। विभागीय कार्रवाई से बौखलाए कुछ लाइसेंसी अब आबकारी विभाग की छवि खराब करने के प्रयासों में जुटे हैं। हालांकि विभाग का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी और आमजन के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शहर में आबकारी विभाग की सक्रियता के बाद अब ग्राहकों में भी जागरूकता बढ़ रही है। लोग दुकानों पर ओवररेटिंग और अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जनता के सहयोग से ही शराब बिक्री व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सकता है। आबकारी विभाग की सख्ती ने यह साफ कर दिया है कि नियमों के खिलाफ चलने वाले लाइसेंसियों की मनमानी अब ज्यादा दिन तक नहीं चल पाएगी। विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आमजन के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह अभियान जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *